Delta + variant cases in India. कोरोना डेल्टा + वेरिएंट(delta + variant) क्या है

 कोरोना डेल्टा + वेरिएंट(delta + variant) क्या है ? पूरी दुनिया के लिए क्यों है यह चिंता का विषय है?


कोरोना वेरिएंट (variant)क्या होते हैं?

शुरुआत का करोना जो चाइना के वुहान(wahan lab) से निकला था। वह पूरी दुनिया में फैलने के बाद उसमें जो पहला बदलाव देखा गया था। वह ब्रिटेन में देखा गया था।
जिसे अभी के समय में अल्फा वेरिएंट (Alpha variant) कहते हैं। इसका जो संक्रमण का अनुपात था। वह लगभग वुहान वाले कोरोनावायरस के संक्रमण से 2 गुना था। वुहान  वाले कोरोनावायरस से संक्रमित मरीज औसतन 2 से 3 लोगों को संक्रमित कर सकता था। परंतु जो ब्रिटेन में कोरोना का वेरिएंट पाया गया है जिसे अल्फा वैरीअंट (Alpha variant) कहा जाता है। इससे अगर कोई मरीज संक्रमित है तो वह 4 से 5 लोगों को संक्रमित कर सकता है और जो करोना का वेरिएंट भारत में मिला था। उससे अगर कोई व्यक्ति संक्रमित है तो वह 8 से 9 लोगों को संक्रमित कर सकता है।

    डेल्टा + वेरिएंट( data + variant) क्या है?

    कोरोनावायरस में आने वाले यह बदलाव से पहले से अधिक घातक और खतरनाक बना देते हैं इस बदलाव को हम कोरोना वेरिएंट कहते हैं और कोरोना डेल्टा वेरिएंट ( delta variant) बहुत खतरनाक है इसका संक्रमण बहुत तेजी से फैलता है और बहुत जल्दी व्यक्ति की जान ले लेता है
    मई 2021 में डेल्टा वेरिएंट(delta variant) में भी बदलाव देखा गया है। यह डेल्टा प्लस वैरीअंट (delta + variant) बन गया है। यह बहुत ही खतरनाक है और WHO ने इसे (variant of concert) यानी पूरी दुनिया को इसके बारे में चेतावनी दिया है। कि इस पर बहुत जल्दी कोई निर्णय लेना जरूरी है आज के समय में डाटा + वेरिएंट  लगभग 10 से 12 देशों में फैला हुआ है वर्तमान में इससे ज्यादा देश भी प्रभावित हो सकते हैं। यह सबसे ज्यादा ब्रिटेन में पाया गया था। 
    हालांकि ब्रिटेन में ज्यादातर लोगों को कोरोना की कम से कम एक डोस़ वैक्सीन लगाई जा चुकी है वहां लगभग 60% लोगों को वैक्सीनेट किया जा चुका है। और रूस और इंडोनेशिया में भी डेल्टा + वेरिएंट से बहुत तेजी से लोग संक्रमित हो रहे हैं। और इजराइल में भी डेल्टा  + वेरिएंट  का संक्रमण देखा गया है। वहां 1 दिन में 150 मरीज पाए गए। तो इजराइल ने इस पर बहुत तेजी से निर्णय लिया। और कहा कि अब हर जगह मास्क लगाना अनिवार्य है और इजराइल पहला देश बन गया है जिस ने कहा है कि आपको घर में भी मास्क लगा कर रखना होगा। तो वहां 150 से 200 मरीज डेल्टा + वेरिएंट  के मिलने पर इतना सख्त निर्णय लिया। हालांकि उसकी जनसंख्या 90 लाख के आसपास है।
     लेकिन भारत की बात की जाए तो भारत में लगभग 12 राज्य डेल्टा + वेरिएंट  से प्रभावित हैं। यह महाराष्ट्र से शुरू हुआ था। और इससे पहली मौत मध्य प्रदेश में देखी गई। इसके बावजूद भारत में लोग बेखौफ होकर (छुट्टा सांड) घूम रहे हैं। कोरोना के फैलने से ज्यादा खतरा नहीं है। जितना कि उसका रूप बदलने से है।क्ष जैसे अगर 1000 लोगों को कोरोना हुआ है। फिर अगले व्यक्ति को जो करोना होगा वह नई किस्म का कोरोना होगा। भारत में तो लाखों लोगों को करोना  हुआ है। तो क्या पता फिर एक नई किस्म का करोना वेरिएंट उत्पन्न हो जाए। इसीलए कोरोनावायरस को जड़ से खत्म करना बहुत जरूरी है तभी हम सब लोग इससे बच पाएंगे।

    करता कोरोना की तीसरी लहर आएगी?

    अगर हम लोग कोरोना की तीसरी लहर से पहले 60% परसेंट जनसंख्या को वैक्सीनेट कर देते हैं तो आसानी से करोना कि तीसरी लहर से बचा जा सकता है और यह वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है।
     अमेरिका में एक सर्वे किया गया। और मई के महीने में कुछ आंकड़े दिए गए जिसमें 18000 लोगों की मौत हुई थी। इस सर्वे में देखा गया कि मई के महीने में जितने लोगों की मौत हुई है उन्होंने कोरोना वैक्सीन की एक भी डोज़ नहीं ली थी। लेकिन उसमें से  150 लोग ऐसे भी थे। जो वैक्सीन लेने के बाद भी मर गए। तो पूरे अमेरिका में पता किया गया कि ऐसे कितने लोग हैं 
    जिनको वैक्सीन लगाने के बाद भी कोरोना हो गया। तो पाया कि लगभग 8.5 लाख लोग ऐसे थे जिनको वैक्सीन लगाने के बाद भी करोना हो गया था लेकिन करोड़ों लोगों को वैक्सीन देने के बाद 8.5 लाख लोगों को ही कोरोनावायरस से संक्रमित हुए। उन्होंने भी वैक्सीन की एक डोज़ ही ली थी। और उस में से केवल 150 लोगों की मौत हुई। जो 150 लोग मरे थे उनकी भी उम्र अधिक थी और उनको कई अन्य बीमारियां भी थी। तो करोड़ों लोगों को वैक्सीनेट करने के बाद केवल 150 लोगों की मौत हुई। 
    इससे पता चलता है कि वैक्सीन कितनी असरदार है और भारत में भी तीसरे लहर से पहले वैक्सीनेशन को तेज करना बहुत जरूरी है क्योंकि भारत में जो  CO-वैक्सीन है इसका उत्पादन भी अब बहुत तेज हो जाएगा। और रूस की जो स्पूतनिक-V वैक्सीन(Sputnik-V vaccine) है। इसको छह कंपनियां मिलकर बना रही है। जुलाई के दूसरे सप्ताह से इसका उत्पादन भी बहुत तेज हो जाएगा। और वैक्सीनेशन बहुत तेज कर दिया जाएगा। और तब हम भारत में कोरोना की तीसरी लहर को रोक सकते हैं

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