hongkong, china dispute. क्या वास्तव में हांगकांग चीन का ही है जानिए पूरा मामला??

चीन की सरकार हांगकांग को अपने देश का अंग मानती है? क्योंक्या है हांगकांग का इतिहास !


हांगकांग(Hongkong) बहुत ही विकसित देश (devloped country) है। चीन इस देश पर अपना अधिकार जताता है। की हांगकांग(Hongkong) मेरा है यह चीन के बिल्कुल निचले भाग में समुंदर से लगा हुआ हैं।

    कैसे अलग हुआ चीन से हांगकांग(Hongkong)!

    हांगकांग(hongkong) का इतिहास जानने के लिए 200 साल पीछे जाना पड़ेगा। जब हिंदुस्तान गुलाम था।
      हिंदुस्तान में अंग्रेजों का शासन चलाता था। अंग्रेजी कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी(British East India company) को भारत मिल गया था। और उनका पूरा ध्यान था कि भारत को कितनी बेरहमी से लूटा जाए। फिर ईस्ट इंडिया कंपनी को लगा कि चीन को भी लूटा जाए।
     इस पर भी शासन किया जाए। उस समय चीन में चाय और रेशम का व्यापार बहुत होता था। चीन की अर्थव्यवस्था इसी व्यापार पर चल रही थी। क्योंकि चीन में चाय और रेशम बहुत ज्यादा होता था।
     ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी(British East India company) भारत में जो व्यापार करती थी। वह तो बलपूर्वक या शासन द्वारा कर लेते थे। उस समय ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी चाहती थी कि चीन से व्यापार करें और बदले में उन्हें पैसे ना दे कर कुछ सामान दे दिया जाए। अंग्रेज ब्रिटेन से सामान मंगाते और चीन में बेच देते थे। और बदले में चाय और रेशम खरीद लेते थे। लेकिन चीन वाले ब्रिटेन के समान में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाते थे। और उनका सामान नहीं खरीदते थे। तब अंग्रेजों वालों ने दिमाग लगाया और चीन के लोगों को (OPM) अफीम (Drug) का नशा लगा दिया।
    चीन के लोगों को अफीम(OPM) की लत इतनी भयानक लगी कि चीन के लोगों लोग जो चाय और रेशम बेचते थे। उसके बदले में वह अंग्रेजों से अफीम खरीद लेते थे। इससे अंग्रेजों को दुगुना लाभ होता था। वो भारत के लोगों को मारपीट कर अफीम (OPM) की खेती करवाते थे। और चंद कीमतों पर खरीद कर उनसे मारपीट कर ले लेते थे। आपने भारत की गुलामी की कहानी तो पढी ही होगी।
    अंग्रेजों को भारत से अफीम(OPM)  मिल जाता था और इसी अफीम(OPM) को वह चीन के लोगों को देकर उनसे बदले में चाय और रेशम ले लेते थे। क्योंकि अंग्रेजों को पता था एक बार अगर चीन के लोगों को अफीम(OPM) का नशा लग गया तो वह अपना सब कुछ बेच कर भी अफीम(OPM)  खरीदेंगे।
     इससे चीन को घाटा लगने लगा। क्योंकि चीन का चाय और रेशम का मुख्य व्यापार वह अफीम के बदले में बर्बाद होने लगा।  तो चीन ने अपने देश में अफीम को अवैध घोषित कर दिया। उन्होंने कहा कि अब कोई हमारे देश में अफीम नहीं बेच सकता। अंग्रेजों ने चीन में अफीम बेचने के लिए चीन के साथ युद्ध कर लिया।  यह अफीम युद्ध दो बार हुआ था पहला अफीम युद्ध 1839 से 1842 के बीच हुआ।जिसमें चीन की हार हुई थी और अंग्रेजों ने चीन का एक शहर हांगकांग(Hongkong) पर कब्जा कर लिया था। और वहां से अंग्रेज अफीम को चीन में भेजते थे। तो कुछ सालों बाद चीन ने फिर इसका विरोध किया और फिर से द्वितीय अफीम युद्ध हुआ  1856 से 1860 के बीच में। इसमें भी चीन हार गया और ब्रिटेन ने चीन के और ज्यादा हिस्सों पर कब्जा कर लिया।  लेकिन चीन इसका हमेशा था। और अंग्रेज भी केवल चीन को अफीम देकर चाय और रेशम खरीदने में दिलचस्पी रखते थे। लेकिन बाद में चीन हांगकांग को लेकर बहुत ज्यादा विरोध करने लगा। तो अंग्रेजो ने हांगकांग को भाड़े(Lease) पर ले लिया। और कह दिया कि हम आपको समय-समय एक निश्चित कीमत देंगे। 
    क्योंकि अफीम से अंग्रेजों को बहुत फायदा हो रहा था। इसलिए ब्रिटेन ने हांगकांग को 1898 में 99 सालों के लिए  भाड़ा (Lease) पर ले लिया। अब यह 99 साल 1997 में खत्म हो गया था। तो चीन को पता था कि जब 1997 में ब्रिटेन हांगकांग(hongkong) से जाएगा तो हांगकांग चीन का ही होगा। क्योंकि पहले भी हांगकांग चीन का ही था।

    हांगकांग (hongkong) इतना विकसित कैसे हुआ!

    हांगकांग(hongkong)  मुख्य समुद्री मार्ग पर था। जिस
    कारण वह बहुत ज्यादा विकसित हो गया था क्योंकि उस समुद्री मार्ग से बहुत सारा व्यापार होता था। वहां से कोई भी जहाज गुजरता तो हांगकांग से होकर जाता था हांगकांग में ही पेट्रोल भरवाता था। और हांगकांग के बंदरगाह पर रुकने के लिए हांगकांग (hongkong)को टैक्स देता था। इसलिए दुनिया की अधिकतर कंपनियां हांगकांग में जाकर अपना व्यापार करने लगी। और अत्यधिक व्यापार के कारण हांगकांग इतना ज्यादा विकसित हो गया।

    1997 में हांगकांग (hongkong) की अधिकतर कंपनियां कहां गई?

    हांगकांग(hongkong)   की कंपनियां सोचने लगी कि अगर 1947 में ब्रिटेन हांगकांग से चला जाएगा। तो चीन हमारी स्वतंत्रता को छीन लेगा। चीन ऐसा ना करें इसीलिए ब्रिटेन वालों ने हांगकांग(hongkong) छोड़ने से पहले चीन की से एक समझौता कर लिया। कि आपके एक देश में दो कानून चलेंगे। (One nation two los).  ब्रिटेन ने इसको हांगकांग पर 50 सालों तक लागू करवा लिया। कि अगले 50 सालों तक हांगकांग स्वतंत्र रहेगा। आप इसमें कोई बदलाव नहीं करेंगे। तो ब्रिटेन ने कंपनियों को कहा कि 50 साल में आप कहीं और स्थापित हो जाना। परंतु कंपनियों को लग रहा था। कि जैसे ही ब्रिटेन 1997 में जाएगा चीन जबरन हांगकांग पर कब्जा कर लेगा। क्योंकि चीन का वादा उतना ही चलता है जितना कि चीन का सामान चलता है 
    उस समय बहुत सी कंपनियां हांगकांग(hongkong) से भागकर जाने लगी। फिर कंपनियां अपना नया ठिकाना खोजने लगी। 
    तब दुबई(UAE) ने इन कंपनियों को अपने देश में आने के लिए लुभाने लगा। और हांगकांग(hongkong) से भागी हुई कंपनियां दुबई (UAE) में जाकर बस गई। जिसके कारण

    दुबई(UAE विकसित गाथा।

    दुबई(UAE) बहुत ज्यादा विकसित हो गया। आप तुलना कर सकते हैं 1990 का दुबई(UAE) और 2015 के दुबई(UAE) में। हांगकांग से  ब्रिटेन जाने के बाद शुरुआत में तो चीन ने हांगकांग में कुछ नहीं किया। चीन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है। जबकि हांगकांग में अभिव्यक्ति की पूरी आजादी है।  लेकिन चीन धीरे-धीरे हांगकांग की स्वतंत्रता खत्म करने लगा। और पश्चिमी देश हांगकांग को बचाने के लिए उसे समर्थन करने लगे। जैसे अमेरिका ने हांगकांग के सामान पर टैक्स(tex) को कम कर दिया था। पश्चिमी देश चाहते थे कि हांगकांग (hongkong) का अस्तित्व बना रहें। लेकिन चीन इसका फायदा उठाया था वह अपने सामान को

    हांगकांग(hongkong)  भेजता था। और हांगकांग से अमेरिका भेज देता था। ताकि उसके समान पर टैक्स (Tex) कम लगे। और अमेरिका को भी यह बात पता थी। लेकिन वह कुछ कर नहीं सकता था। क्योंकि वह नहीं चाहता था कि हांगकांग चीन का हिस्सा बने। लेकिन हांगकांग(hongkong) को तो चीन का हिस्सा बनना ही पड़ेगा। क्योंकि ब्रिटेन द्वारा किया गया समझौता 1997 से 2047 तक रहेगा। इसके बाद तो कानूनी तौर पर हांगकांग(hongkong)  2047में चीन का हिस्सा बन जाएगा।

    Comments