Corona variant name in India.क्या है कोरोना के अलग-अलग वेरिएंट? (delta variant) ने मई 2021 में भारत में मचाई तबाही।
क्या है कोरोना के अलग-अलग वेरिएंट? (delta variant) ने मई 2021 में भारत में मचाई तबाही।
चाइना ने पूरी दुनिया में कोरोना फैलाया। और इसमें कई सारे बदलाव आते गए। कोरोना में हो रहे अलग-अलग बदलाव के कारण यह और भी घातक होता जा रहा है इसी में हुए एक बदलाव ने भारत में कोरोना कि दूसरे लहर में भयंकर तबाही मचाई और लाखों लोगों की जान ले लिया
जितनी ज्यादा करोना की संख्या बढ़ेगी इसमें उतने ही बदलाव आते जाएंगे। हम लोगो के पास वर्तमान में कई तरह के करोना है कोरोना में हो रहे बदलाव को ही हम म्यूटेशन(mutation) या वैरीअंट (variant) कहते हैं।
कोरना (variant) क्या है?
जब कोरोन शुरुआत हुआ तो उसे कोरोनावायरस कहा गया कि जो चीन से निकला था लेकिन अभी तो पूरी दुनिया में फैल गया है। जब करोना एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में संक्रमित होता है तो वह 100% परसेंट हूबहू पहले वाले की तरह नहीं होता। उसके जो प्रोटीन(protein) या जेनेटिक मैटेरियल आर एन ए (genetic material RNA) होता है उसमें कुछ ना कुछ बदलाव आ जाता है जिसे म्यूटेशन(mutation) कहते हैं करोना के दूसरे बदलाव से हमें कोई खतरा नहीं है लेकिन इस कोरोनावायरस में कुछ ऐसे भी बदलाव आए जो हमारे लिए बहुत घातक सकते हैं जो चिंता का विषय है
विभिन्न देशों का कोरोना वैरिएंट
कोरोना का ही एक बदलाव था (B.1.1.7) जे ब्रिटेन में पाया गय था और दूसरा ( B.1. 351) यह दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था और तीसरा (P.1) यह ब्राजील में पाया गया था और चौथा (B.1.617.2) यह भारत में पाया गया था।
यह सबसे कोरोनावायरस के जेनेटिक कोड (genetic code) नाम है यह काफी जटिल प्रक्रिया होती है जेनेटिक कोड(genetic code) नाम को निर्धारित करना उस हिसाब से यह नाम दिया जाता है। लेकिन हर किसी को यह कोड नाम बोलना बहुत मुश्किल लगता था। तो लोग इसे उस देश के नाम पर बुलाते थे जिस देश में इसे सबसे पहले देखा गया।
जैसे कि भारत के कोरोना में जो बदलाव देखा गया (B1.617.2) इसे लोग इंडियन वेरिएंट(Indian variant) कहने लगे। तो वैसे ही ब्रिटेन के कोरोनावायरस में आए बदलाव को ब्रिटेन वेरिएंट (Britain variant) कहने लगे।
WHO ने कोरोना वैरिएंट का किया नामकरण
मिलकर WHO के पास गए और WHO के प्रमुख(chief) ट्रेडोस (Trados) से इन देशों ने शिकायत की। और कहा कि जो कोरोनावायरस चीन से निकला था उसका तो कोई वेरिएंट ही नहीं था। इसलिए उसे करोना कहा गया। लेकिन इसका भी जेनेटिक कोड(G614) था। लोग कोरोनावायरस को उसके देश के नाम पर ना कहें इसके लिए WHO के प्रमुख ने कहा है कि कुर्ला की अलग-अलग वेरिएंट के लिए ग्रीक शब्दों का प्रयोग किया जाएगा। जो ब्रिटेन में कोरोना वेरिएंट पाया गया था। उसे अल्फा वेरिएंट(alpha variant) कहेंगे और जो दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था उसे बीटा वेरिएंट(beta variant) कहेंगे उसी तरह ब्राजील वाले को गामा वैरीअंट(Gama variant) कहेंगे और भारत में कोरोना के दो वेरिएंट पाए गए थे उसमें ज्यादा का अंतर नहीं था एक (B1.617.2 )और दूसरा (B.1.617.1).
कोरोना वैरिएंट के शिकार हुए युवा
एक का नाम रखा गया डेल्टा वेरिएंट(delta variant) दूसरे का नाम रखा गया कप्पा वेरिएंट्स(couple variant) सभी में अगर सबसे ज्यादा खतरनाक कोई है तो वह डेल्टा वेरिएंट है। इसी वेरिएंट ने भारत में कोरोना की दूसरी लहर में भयानक तबाही मचाई युवाओं को भी नहीं छोड़ा और लाखों लोगों की जान ले लिया।
यह वैरीअंट भारत में अप्रैल- मई 2021 में आया था इसमें बुजुर्गों को ज्यादा संक्रमण नहीं हुआ था। क्योंकि उनको एक डोज़ वैक्सीन की लग चुकी थी। पूरी दुनिया में इसके प्रति चिंता का विषय बना हुआ है। इन वेरिएंट के लिए ग्रीक शब्दों का प्रयोग ना किया होता तो आज पूरी दुनिया में भारत की बदनामी होती कि इंडियन वेरिएंट (Indian variant)बहुत खतरनाक है
जबकि कोरोनावायरस चीन से निकला था और उसका नाम ही बदनाम नहीं होता। लेकिन वैज्ञानिक आज भी इन वेरिएंट (variant ) को इनके जेनेटिक कोड(genetic code name) नाम से ही बुलाते हैं। लेकिन जून के महीने में भारत में एक और वेरिएंट पाया गया जिसका नाम है डेल्टा प्लस वैरीअंट (delta + variant) और इस वेरिएंट पर देखा गया है कि वैक्सीन (vaxin) काम नहीं कर पाती। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि भारत में सभी को वैक्सीन लगा लगा लगाई जाए जिससे कि वह करोना के बाकी वेरिएंट से बच सकें।क्योंकि जब तक इसको फैलने से नहीं रोकेंगे। तब तक इसके वेरिएंट बनते रहेंगे।



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