Hong Kong protest 2014. 17 लाख लोग हांगकांग में सड़कों पर क्यों कर रहे हैं चीन के खिलाफ आंदोलन??

हांगकांग क्यों कर रहा है चीन के खिलाफ प्रदर्शन??

ब्रिटेन द्वारा चीन के साथ किए गए 1997 में समझौते के तहत 2047 में हांगकांग(hongkong) पर चीन का पूरा अधिकार हो जाएगा। लेकिन चीन चाहता है। कि जब वह 2047 में हांगकांग (hongkong) पर अधिकार करें तब तक यहां के लोगों को मार-पीट कर उनको उसी रंग में ढल चुका हो। जिस रंग में चीन के बाकी राज्य ढले हुए हैं। चीन ने हांगकांग(hongkong)  के लोगों पर मारपीट करना धीरे-धीरे शुरू कर दिया है।

हांगकांग(hongkong)क्यों है चीन से नाराज?

2014 में चीन ने हांगकांग(hongkong) में कई गलत नियम और नीतियां लाई। जिसका विरोध करने के लिए हांगकांग(hongkong)  में 1000000 लोग सड़कों पर आ गए और प्रदर्शन करने लगे। फिर धीरे-धीरे जब भी चीन को मौका मिला उसने हांगकांग के लोगों को अपने कब्जे में करने की कोशिश करता रहा है। इस उम्मीद में कि 2047 आते-आते हम हांगकांग(hongkong) के लोगों को पूरी तरह से अपनी मुट्ठी में कर लेंगे। ताकि वन चाइना पॉलिसी(One china police) पूरे चीन में लागू हो सके।


    कोन है कार्ली लोम((Carlie lom)???

     हांगकांग(hongkong)  में 2017 में एक नया विरोध होने लगा 2017 में चीन ने एक नियम बना दिया। कि हांगकांग में होने वाले चुनाव में वही प्रतिद्वंदी खड़े होंगे। जिनको चीन की सरकार इजाजत देगी। यानी हांगकांग(hongkong) में चुनाव होगा। पर वहां के लोग उन्ही प्रतिद्वंद्वियों को चुनेंगे जिन्हें चीन के बीजिंग में बैठी सरकार इजाजत देगी। और चीन ने कर्ली लोम ( Carlie lom) को हांगकांग में चुनाव

    प्रतिद्वंदी के रूप में भेजा था। यह चीन के समाजवादी सरकार की बहुत करीबी है। कर्ली लोम(Carlie lom) वर्तमान 2020 में हांगकांग की मुखिया (Chiff executive) हैं। मतलब हांगकांग के सभी निर्णय यही लेती हैं। यह केवल कहने के लिए हैं कि इनका चुनाव हुआ है लेकिन इन्हें भेजा चीन की सरकार ने ही है। और यह पूरी तरह से चीन के इशारों पर काम करती हैं। अगर नहीं करेंगे तो अगले दिन यह लापता हो जाएंगी। चीन की सरकार के लिए किसी की जान लेना उतना ही आसान है जितना कि भारत में मोर्टीन(mortein) जलाकर मच्छर की जान लेना है । लेकिन इनके खिलाफ भी हांगकांग में बहुत बड़ा प्रदर्शन होने लगा। और इस प्रदर्शन को चीन नहीं दबा पाया। क्योंकि चीन में सोशल मीडिया(social media) को बिल्कुल आजादी नहीं है। लेकिन हांगकांग (hongkong) में सोशल मीडिया (social media) पूरी तरह स्वतंत्र हैं। और हांगकांग में अभिव्यक्ति की आजादी भी है उस समय हांगकांग में विदेशी मीडिया भी मौजूद थे। और पत्रकार भी मौजूद थे। इसीलिए चीन की सरकार इस प्रदर्शन को नहीं दबा पाई।क्योंकि हांगकांग के लोग फेसबुक और ट्विटर पर चीन का विरोध करते थे लेकिन चीन ने अपने लोगों को हमको में भेजकर फेसबुक, टि्वटर पर फेक आईडी बनाकर लोगों को हांगकांग के लोगों को भड़काने लगा था इसलिए हांगकांग ने फेसबुक और ट्विटर से शिकायत की तो फेसबुक और ट्विटर ने हांगकांग में मौजूद सभी फेक आईडी को मिटा दिया  इसीलिए चीन को मजबूर होकर(hongkong)  की बात माननी पड़ी।

    चीन चाहता है कि जब भी उसे मौका मिले हांगकांग (hongkong) को दबाकर रखें। और उसे2018 में मौका मिल गया।  

    हांगकांग का एक लड़का(Chan tong kai)  अपनी दोस्तGirl friend) को ताइवान (Tiban)घुमाने ले गया और ताइवान(Tiban) में उस लड़के ने अपनी दोस्त( Girl friend) की हत्या कर दी। और उसकी लाश(body) को ताइवान(Tiban) में छोड़कर हांगकांग(hongkong) भाग आया। फिर ताइवान की पुलिस को जब यह पता चला तो ताइवान की सरकार ने हांगकांग(hongkong) से कहा कि आप (Chan tong kai) को हमें सौंप दीजिए क्योंकि उसने ताइवान में हत्या का अपराध किया है और जिसकी हत्या हुई है उसकी लाश को आप ले जाइए ।

    national security law करता था?

    2018 में हांगकांग(hongkong) के पास कोई ऐसा कानून नहीं था कि जिस में हांगकांग अपने अपराधियों को दूसरे देश को सौंप सकें।

    तो 2019 में कर्ली लोम(Carlie lom) ने एक कानून पारित किया कि जो हांगकांग(hongkong)  के नागरिक अपराध करेगा उसे सजा सुनाने के लिए ताइवान या चीन भेज दिया जाएगा। और इसका नतीजा यह हुआ कि चीन ने हांगकांग के कुछ दुकानदारों को इसलिए गोली मरवा दिया क्योंकि वहां की किताबों में चीन के खिलाफ लिखा हुआ था। फिर बाद में चीन ने चार्ली  लोम(Carlie lom) से कहकर एक नया (national security law) पारित करवा दिया। जिसके तहत अगर हांगकांग का नागरिक विरोध प्रदर्शन करता है या सरकार के खिलाफ बोलता है या सरकार का विरोध करता है तो उसे देश विरोधी, देशद्रोह माना जाएगा। और उसे प्रत्यर्पण संधि 2019 के तहत चीन भेजा जाएगा और वहां पर उस पर मुकदमा चलेगा और चीन की अदालतों में मुकदमा 2 दिन में खत्म हो जाता है तीसरे दिन फांसी दे दिया जाता है। इस प्रकार चीन ने हांगकांग(hongkong) में भी अपनी तानाशाही शुरू कर दिया है। हांगकांग के एक लड़के के कारण पूरे हांगकांग की आजादी खतरे में आ गई।

    2020 में चीन को बहुत अच्छा मौका मिल गया। कोरोना महामारी में हांगकांग(hongkong)के लोगों पर जितना अत्याचार करना चाहते हो कर दो। कोई विरोध प्रदर्शन भी नहीं होगा और पूरी दुनिया भी कुछ नहीं बोलेगी। क्योंकि करोना महामारी में अगर लोग भीड़ लगाकर प्रदर्शन करेंगे तो चीज आराम से कहेगा कि कोरोना महामारी में आप एक जगह पर भीड़ नहीं लगा सकते। और भारत भी चीन के साथ हांगकांग(hongkong) का मुद्दे पर कोई विरोध नहीं करेगा।


    जब भारत ने कश्मीर से 370 खत्म किया।

    क्योंकि जब 2019 में भारत ने कश्मीर से 370 खत्म किया था। तो भारत ने साफ कह दिया था कि भारत का यह आंतरिक मामला है इसमें वह किसी तीसरे की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं करेगा। चीन ने भी इस बार भारत से कह दिया है कि हांगकांग(hongkong)चीन का आंतरिक मामला है और भारत इसमें हस्तक्षेप ना करें। 
    इसमें भारत के लिए भी एक फायदा है कि अगर चीन  हांगकांग पर अधिक अत्याचार करता है तो हांगकांग(hongkong) की कंपनियां हांगकांग को छोड़कर किसी दूसरी जगह पर चली जाएंगी। और भारत उन कंपनियों को इस बार दुबई नहीं जाने देगा। उन्हें भारत में ही बुला लेगा। चीन को परेशानी यह है कि अगर हांगकांग(hongkong) के ऊपर ज्यादा दबाव बना दिया तो वहां की कंपनियां भाग जाएंगी। और अगर दबाव नहीं बनाया तो वहां के लोग लगातार चीन का विरोध करते रहेंगे। लेकिन 2047 में तो हांगकांग(hongkong)को आधिकारिक रूप से चीन का ही होगा।

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