Naxal attack started in India.भारत में नक्सलवाद का आगमन कब शुरू हुआ था??
भारत में नक्सलवाद का आगमन कब शुरू हुआ था?? नक्सलवाद की समस्या कब शुरू हुई??
नक्सल आंदोलन क्या था??? 1967
आजादी के बाद भारत के किसानों की स्थिति बहुत दयनीय थी उस समय बाल मजदूरी और बेरोजगारी अपनी चरम सीमा पर थी। और ठेकेदार और जमीदार लोग गरीब लोगों पर बहुत अत्याचार करते थे।
इसी बीच 1967 में समाजवादी विचारधराओं के नेताओ ने इसका विरोध किया था। उन्होंने गरीबों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ एक आंदोलन चला दिया और इस आंदोलन ने काफी बड़ा आंदोलन का रूप ले लिया।
नक्सल प्रभावित क्षेत्र।
पश्चिमी बंगाल का एक जिला है दार्जिलिंग उसके एक गांव नक्सलवाड़ी से यह आंदोलन शुरू हुआ था और केवल गरीबों पर हो रहे अत्याचार और असमानता के खिलाफ था।
परंतु वर्तमान में नक्सलवाद आतंकवाद का रूप ले लिया है। नक्सलवाद समाजवाद का ही एक हिस्सा है यह अपने ही मार्ग से भटक गया है। लेकिन यह आंदोलन इसलिए था क्योंकि यह सभी को कहना चाहते थे कि गरीब और पिछड़े हुए लोगों के साथ भेदभाव ना करें, उनके साथ समानता का भाव रखें। भारत में असमानता का अंदाजा इस बात से लगाइए कि भारत में 1% आबादी ऐसी है जिनके पास पूरे भारत का 70% पैसा है उनके पास हर सुख सुविधाएं हैं वहीं दूसरी ओर 99% वह लोग हैं जिन्हें दो वक्त की रोटी भी मुश्किल से मिलती हैं इसलिए असमानता के खिलाफ यह नक्सलवाद आंदोलन चलाया गया आंदोलन था। आंदोलनकारी किसानों को अपने आंदोलन में शामिल कर लेते थे देश में किसान की सुनने वाला कोई नहीं था। इसीलिए किसान अपनी आवाज उठाने के लिए इस आंदोलन में शामिल हो जाया करते थे। जैसे दिल्ली के सिंधु बॉर्डर पर किसान आंदोलन में अब उन्हें कोई ही नहीं ध्यान ही नहीं दे रहा है ऐसी ही घटनाओं में नक्सलवादी किसानों को समझाने में सफल हो जाते हैं। सरकार ने भी नक्सलवादियों के खिलाफ कुछ सख्त कदम उठाए थे 2009 2019 तक भारत में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 233 थी। और अभी के समय में 90 जिले ही नक्सल प्रभावित है
इसमें अच्छी बात यह है नक्सल प्रभावित जिलों कि संख्या घट रही है और बुरी बात यह है कि कुछ ऐसे भी जिले थे जहां नक्सल प्रभावित समस्या नहीं थी पर वर्तमान में वहां नक्सल क समस्या है।
सरकार द्वारा उठाए गए कदम।
सरकार की ओर से भी कुछ गलतियां हुई थी जो नक्सली हमले को बढ़ावा दे दी। 2005 से पहले नक्सली ज्यादा हमला नहीं करते थे 2005 में बीजेपी के नेता महेंद्र कर्मा जो बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे 2005 में इन्होंने एक
आंदोलन शुरू किया था जिसका नाम था सुलवा जुडूम। 18 से 20 साल के लड़कों- युवाओं को हथियार दे दिया था। और कह दिया था कि नक्सलियों को खोज- खोज के मारो लेकिन सुलवा जुडूम के लोग नक्सलाइट को तो मारते थे और अपनी पुरानी दुश्मनी भी निकालते थे। यह मामला चला गया सर्वोच्च न्यायालय में और सर्वोच्च न्यायालय ने सुलवा जुडूम को प्रतिबंधित कर दिया। सुलवा जुडूम के सदस्यों को ₹3000 मासिक वेतन भी दिया जाता था।
आंदोलन शुरू किया था जिसका नाम था सुलवा जुडूम। 18 से 20 साल के लड़कों- युवाओं को हथियार दे दिया था। और कह दिया था कि नक्सलियों को खोज- खोज के मारो लेकिन सुलवा जुडूम के लोग नक्सलाइट को तो मारते थे और अपनी पुरानी दुश्मनी भी निकालते थे। यह मामला चला गया सर्वोच्च न्यायालय में और सर्वोच्च न्यायालय ने सुलवा जुडूम को प्रतिबंधित कर दिया। सुलवा जुडूम के सदस्यों को ₹3000 मासिक वेतन भी दिया जाता था।
2013 में बहुत खतरनाक नक्सली हमला हुआ था जिसमें महेंद्र कर्मा की मौत हो गई थी इसके बाद नक्सलियों का अंबार लग गया। लगातार बढ़ते नक्सलियों के हमले का मुख्य कारण है सरकारी योजनाएं क्योंकि सरकारी योजनाएं ऐसी होती है कि ऊपर ही ऊपर खत्म हो जाती है इसी भ्रष्टाचार के विरोध के लिए नक्सली हमला करते हैं। हेलो हेलो हेलो भ्रष्टाचार को खत्म करने में भारत 86 स्थान पर है
नक्सलियोंके लिए भारत में बहुत बड़े बड़े कदम उठाए हैं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समाधान योजना चलाई है इस योजना के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से किया जाएगा। वहां सड़कें बनाई जाएंगी, पुल बनाए जाएंगे, नेटवर्क को बढ़ाया जाएगा और नक्सली इस निर्माण कार्य में बाधा बनेंगे तो धीरे-धीरे वे ग्रामीणों का समर्थन खो देंगे। क्योंकि यह ग्रामीणों के लिए निर्माण कार्य होगा। ताकि वह लोग भी मुख्यधारा में मिल सके और नक्सलियों से दूरी बना सकें।
नक्सलियोंके लिए भारत में बहुत बड़े बड़े कदम उठाए हैं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समाधान योजना चलाई है इस योजना के तहत नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य तेजी से किया जाएगा। वहां सड़कें बनाई जाएंगी, पुल बनाए जाएंगे, नेटवर्क को बढ़ाया जाएगा और नक्सली इस निर्माण कार्य में बाधा बनेंगे तो धीरे-धीरे वे ग्रामीणों का समर्थन खो देंगे। क्योंकि यह ग्रामीणों के लिए निर्माण कार्य होगा। ताकि वह लोग भी मुख्यधारा में मिल सके और नक्सलियों से दूरी बना सकें।


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