Coronavirus symptoms?


ब्लैक फंगस (black fungus, Mucormycosis) जानने से पहले यह भी जाने!!


साइटोकाइनिन स्टोर्म(cytokinin storm) क्या है ?

करोना मरीजों में अगर सबसे ज्यादा जान किसी ने लिया है तो वह साइटोकाइनिन स्टोर्म ने लिया है। यह साइटोकाइनि स्टोर्म एक तरफ से अच्छा भी है लेकिन उससे पहले हम समझते हैं !

    इन्फ्लेमेशन(inflammation) क्या होता है. ??

    जब हमारे शरीर में कीटाणुओं का अटैक होता है वायरस, बैक्टीरिया का अटैक होता है या कहीं कट जाता है तो उसे कहते हैं इंफेक्शन।  लेकिन उसे मारने के लिए जब हमारा (immune system) हमारा रोग प्रतिरोधक क्षमता उस पर हावी होती है तो उसको कहते हैं इन्फ्लेमेशन। 

    इन्फ्लेमेशन के कुछ संकेत हैं!

    1. दर्द :  जैसे आपको कहीं चोट लगता है तो दर्द होता है। जैसे मान कर चलिए कि अगर कहीं कट गया है तो थोड़ी देर बाद दर्द होता है क्योंकि तब आपकी बॉडी रिस्पांस करती  है उसे इन्फ्लेमेशन कहते हैं ।
    2.गर्म :  जिस जगह पर चोट लगती है वह गर्म हो जाती है जैसे करोना हो जाने पर पूरा शरीर गर्म हो जाता है बुखार आ जाता है मतलब अब आपकी बॉडी  काम करती है उस बीमारी से लड़ रही है ।
    3.लालपन : जिस जगह पर चोट लगती है वह जगह लाल हो जाती है यह भी इन्फ्लेमेशन का एक संकेत है। 
    4.सूजन : जिस जगह पर चोट लगती है वहां हल्की सूजन आ जाती है जैसे मधुमक्खी ने काट लेने पर वहां सूजन आ  जाती है यह भी इन्फ्लेमेशन का संकेत है ।
    5. प्रभाविक ऊतक: जो अंग हमारा इनफेक्टिड हो जाता है या चोट लग जाती है तो उस अंग से अच्छी तरह से काम नहीं हो पाता वहां की कोशिकाएं प्रभावित हो जाती है जैसे हाथ में बिच्छू  के काटने पर कोई काम नहीं कर सकते हैं 
    }हम कह सकते हैं कि इन्फ्लेमेशन एक अच्छी चीज है हमारी बॉडी की रक्षा में सहायता करती है इंफेक्शन के प्रति। लेकिन कभी-कभी यह इन्फ्लेमेशन हमारे शरीर के लिए घातक साबित हो जाता है जब इन्फ्लेमेशन हो रहा होता है तो हमारे शरीर में मैसेज पहुंचाने के लिए साइटोकाइनिन हार्मोन निकलता है जो इन्फ्लेमेशन को बढ़ा देता है
    }परंतु जब हमारे शरीर पर ऐसी बीमारी का अटैक होता है जिसको हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता पहचानती ही नहीं है तो यह साइटोकाइनिन हमारे लिए घातक सिद्ध होता है। 
    सरल भाषा में कहें तो हमारे शरीर में भगदड़ मच जाती है इतना ज्यादा साइटोकाइनिन निकलने लगता है कि साइटोकाइनिन की आंधी आ जाती है इसी को कहते हैं साइटोकाइनिन स्टोर्म ।(hyper immune response).



    }उदाहरण के तौर पर आप समझिए ।

    घर में एक चूहा निकल गया और मोहल्ले के 200 आदमी तलवार लेकर उसे मारने के लिए आ जाए तो क्या होगा?
     वह आपस में ही कट-फिट के आधे मर जाएंगे तो इससे ज्यादा नुकसान होता है ।
    }इस साइटोकाइनिन के कारण कोरोना के मरीजों को अधिक क्षति पहुंचने लगी। करोना के मरीजों में इतना ज्यादा साइटोकाइनिन निकलता है कि वह फेफड़ों को नुकसान पहुंचाने लगता है कोरोनावायरस को हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता नहीं पहचान नहीं पाती है इसीलिए साइटोकाइनिन 
    इतना ज्यादा निकलता है कि स्टोर्म का रूप ले लेते हैं    

    साइटोकिनिन स्टोन के लक्षण इस प्रकार हैं
    1.सिर दर्द करने लगेगा। 
    2.छाती में दर्द होने लगेगा। 
    3.दोनों किडनी फेल हो जाएगी 
    4.हार्ट अटैक आने का खतरा होता है ।

    }जब व्यक्ति में करोना का कोई लक्षण दिखता है उसके 6 दिन बाद साइटोकाइनिन स्टोर्म के आने का खतरा ज्यादा होता है इस बीच अगर डॉक्टर दवाई देकर उसके खुद के रोग प्रतिरोधक क्षमता को शांत करके बैठा दिया (suppress)कर दिया तो मरीज के फेफड़ों को केवल कोरोनावायरस से ही क्षति पहुंचेगी उसे साइटोकाइनिन से कोई क्षति नहीं पहुंचेगी। 
    अगर साइटोकाइनिन स्टोर्म को शांत नहीं किया गया तो करोना तो उस मरीज के मार ही रहा है साथ ही यह भी उसे क्षति पहुंचाने लगता है जिस कारण मरीज का फेफड़ा कोशिकाओं की लाशों से भर जाता है और मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है

    एस्टेरॉइड क्या होता है ? (डेक्सामेथासोन)

    मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता को स्प्रेस यानी शांत करके बैठा देने का काम करता है एस्टेरॉइड। एस्टेरोइड के रूप में हम प्रयोग करते हैं डेक्सामेथासोन।  डेक्सामेथासोन नाम की दवाई जो हिंदुस्तान में डेक्सोना नाम से काम कर रही है ।
    जब किसी कोरोना मरीज़ की रोग प्रतिरोधक क्षमता को शांत कराने के लिए डेक्सामेथासोन दिया जाता है तभी से एक नए रोग ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ जाता है

    ब्लैक फंगस (black fungus) क्या है??(Mucormycosis)

    ब्लैक फंगस का केमिकल नाम म्यूकोरमायोशिश (mucormycosis) है ब्लैक फंगस एक साधारण (normal ) फंगस है जो रोटी, ब्रेड इत्यादि पर लग जाता है यह साधारण फंगस होते हैं यह हमारे शरीर पर भी जम जाते हैं परंतु हमारा पसीना इन्हें मार कर खत्म कर देता है आप विचार कीजिए जिस ब्लैक फंगस को हमारा पसीना मार के खत्म कर देता है वही ब्लैक फंगस करोना मरीजों की जान ले लेता हैं । अगर किसी कोरोना पीड़ित मरीज़ को अधिक मात्रा में डेक्सामेथासोन दिया जाता हैं। तो उस मरीज़ की रोग प्रतिरोधक क्षमता इतनी कमजोर हो जाती है कि वह इस ब्लैक फंगस से भी नहीं लड़ पाता है ।

    यह ब्लैक फंगस करोना मरीजों में आता कहां से हैं???

    जब कभी कोरोना मरीज़ ज्यादा सीरियस हो जाता हैं तो उसे अधिक मात्रा में डेक्सामेथासोन देना जरूरी होता है क्योंकि उस मरीज को ऑक्सजन मास्क लगा होता है उस ऑक्सीजन पहुंचाने वाले मास्क में एक पानी का बुलबुला होता है वहीं से नमी (moisture) पाकर यह ब्लैक फंगस पैदा होता है यह ब्लैक फंगस हमेशा नमी वाली जगहों पर ही पाए जाते हैं और हमारे नाक के द्वारा शरीर में पहुंच जाता है

    ब्लॉक फंगस (black fungus)के लक्षण क्या है??

    नाक आंख के आसपास लाल और दर्द होना बुखार सिर दर्द खांसी सांस फूलना खून की उल्टियां और मन की शति स्थिति जैसे लक्षण दिखाई देने पर सतर्क हो जाना चाहिए क्योंकि यह ब्लैक फंगस भी हो सकता है किन लोगों को है ब्लॉक कांग्रेस का खतर इन लोगों को शुगर की बीमारी है या उनका मधुमेह नियंत्रित रहता है उनको इसके लिए सतर्क हो जाना चाहिए क्योंकि जिन लोगों को कोरोनावायरस के दौरान स्टेरॉयड दिए जाने के कारण रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आई थी या जो लंबे समय तक आईसीयू में रहे हो या फिर वह किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हूं या उन्होंने अपने कोई अंग दान किया हो या अंग प्रत्यारोपण किया हो उन लोगों को ब्लैक फंगस का खतरा हो सकता है
    ब्लैक फंगस हमारे शरीर में नाक के रास्ते अंदर जाता है जब यह नाक के रास्ते अंदर जाता है तो नाक से पानी का रिसाव होने लगता है वह पानी हल्का भूरा रंग का होता है तो यह पहला संकेत है उसके बाद यह मुंह में आता है तो खांसी आने लगती है कभी-कभी उल्टी होने लगती हैं उल्टी में खून आने लगता है
    उसके बाद यह पहुंचता है आंख में जब आंख में पहुंचता है तो आंख किनारे-कनारे से बहुत ज्यादा लाल हो जाती है तो मरीज की जान का खतरा बढ़ जाता है। क्योंकि आंख के रास्ते ब्लैक फंगस दिमाग में पहुंच जाता है जी हां मरीज़ के मस्तिष्क में । और मरीज की जान ले लेता है
    परंतु घबराने की कोई बात नहीं है ब्लैक फंगस सभी को नहीं होता यह केवल उन्हीं मरीजों को होता है जिनको अधिक मात्रा में डेक्सामेथासोन दिया जाता है या फिर जिनका रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा कमजोर होती है जैसे कि हाई ब्लड प्रेशर(high BP)के मरीज हो गए
    शुगर(sugar) के मरीज हो गए एचआईवी (HIV)पीड़ित मरीज हो गए। अगर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है तो आपको ब्लैक फंगस नाम का रोग नहीं होगा ।
    कोरोनावायरस के मरीजों में ब्लैक फंगस फैल जाने पर मरीज की दर्दनाक मौत होती है जो कि  कोरोनावायरस से पीड़ित मरीजों के लिए बहुत बुरी खबर है क्योंकि दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र,उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे कई राज्यों में ब्लैक फंगस के काफी मामले सामने आए हैं। और कोरोनावायरस से ठीक हो चुके कई लोगों की एक खतरनाक फंगस के चलते या तो आंखों की रोशनी चली गई या फिर उनकी जान भी चली गई यह खतरनाक इंफेक्शन नाक आंख और कभी-कभी दिमाग में भी फैल जाता है इस फंगस से पीड़ित मरीजों को बचाने के लिए उनकी आंख या नाक निकाल दी जाती है और कभी-कभी तो उनके जबड़े भी काटने पड़ते हैं म्यूकरमाइकोसिस फंगस हर जगह होते हैं मिट्टी में हवा में और नमी वाली जगहों पर भी यह फंगस पाई जाती है यहां तक कि एक स्वस्थ इंसान के बाहरी त्वचा और नाक और बलगम में भी होते हैं कोरोना महामारी के दौरान  इस फंगस को भी चिंता का विषय माना जा रहा था साथ ही NCMR ने भी कहा है कि अगर म्यूकरमाइकोसिस को नजरअंदाज किया गया तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। 

     ब्लैक संगत से कैसे करें बचाव ?

    किसी भी धूल उत्तसर्जित क्षेत्र में जाने से पहले मास्क पहन ले जैसे सड़क पर, भवन निर्माण वाली जगह पर ,मैदानों में और अपने पूरे शरीर को ढककर रखें शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले कपड़े पहने और पैरों में जूते भी पहने और मिट्टी और खाद का काम करने से पहले हाथों में ग्लब्स पहन लें जिससे कि वह आपकी त्वचा से सीधे संपर्क में ना आए ।

    कब हो जाए सतर्क ?

    जब आपको नाक से सांस लेने में परेशानी हो रही हो या नाक लंबे समय से बंद हो और गले में दर्द हो या चेहरे का एक हिस्सा सुन्न हो गया हो या सूजन आ गई हो या फिर नाक का ऊपरी हिस्सा काला पड़ गया हो या जबड़े में दर्द हो या आंख दर्द हो और धुंधला दिखाई दे रहा हो या फिर सांस लेने में तकलीफ हो तो समझ जाइए कि यह ब्लैक फंगल के लक्षण हो सकते हैं

    क्या करना चाहिए ?

    कोरोनावायरस से ठीक जो ठीक हो गए हैं जिन्हें कोरोनावायरस हुआ था या जो डायबिटीज के शिकार भी थे जिन्हें डायबिटीज की बीमारी भी थी वह बार-बार नियंत्रित समय पर अपना ब्लड ग्लूकोस जांच करवाते रहें कि कोई असंतुलनता तो नहीं हो रही और हाइपोग्लाइसीमिया पर नियंत्रित करना चाहिए और जो करोना पीड़ित मरीज स्टेरॉइड स्वयं से डॉक्टर की सलाह से ले रहे थे तो उनके सेवन की सही अवधि और सही समय और सही डोज़ का ध्यान रखें और ऑक्सीजन थेरेपी के दौरान साफ पानी का इस्तेमाल करें क्योंकि म्यूकरमाइकोसिस फंगस पानी और नमी वाली जगह पर अधिक पाया जाता है और वही अपनी ताकत बढ़ाता रहता है और एंटीबायोटिक और एंटीफंगल के इस्तेमाल के समय सावधानी बरतें।

    क्या नहीं करना चाहिए ?

    म्यूकरमाइकोसिस  फंगस के किसी भी लक्षण को हल्के में बिल्कुल ना लें अगर आपको इसके लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत सतर्क हो जाएं और डॉक्टर की सलाह से ही अपना ध्यान रखें और कोरोना वायरस के इलाज के बाद नाक बंद और छाती में दर्द को बैक्टीरियल साइंसटिसिस  न माने। म्यूकरमाइकोसिस का इलाज डॉक्टर की सलाह से ही कराएं अपने आप इसका इलाज करने में समय ना गवाएं किसी भी लक्षण के नजर आने पर तुरंत इसका इलाज करवाएं।

    ब्लैक संगत से संक्रमित होने पर किससे मिले 

    अगर आप ब्लैक फंगस या म्यूकरमाइकोसिस से संक्रमित है  या आपको इसके संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं तो आप ENT स्पेशलिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, डेंटिस्ट, आंखों के डॉक्टर, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, बायोकेमिस्ट्स, से मिल सकते हैं और मिलकर अपनी समस्या साझा कर सकते हैं और सलाह भी ले सकते हैं और अपना इलाज भी करवा सकते हैं।

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